poempuri
welcome to my creative world
Wednesday, July 15, 2020
Poempuri
इस बार , इस साल देखा मैंने ,
अपनी आंखों से धरती के रंग में रंगे ,
प्रिय किसान मित्र को ,
मिट्टी के कीचड़ से सने ,
मिट्टी के लाल प्रिय किसान मित्र को ,
हर रोज मैं अपने घर के छत से - देखता
नित - रोज बदलते इनके ढंग को ,
कैसे हुई शुरुआत - इस साल
बीज से पौधे की देखा -
इन्हे पालता - पोसता ,
प्रिय किसान मित्र को ,
बिन मिट्टी में मिले ,
दबे सृजन जीवन का होता नहीं ,
बिन ताप , थपेड़े हवा के
जीवन सुदृढ़ बनता नहीं ,
खुब जानते है ये
मिट्टी और मौसम के मिजाज को ,
जैसे घुले - मिले और पले - बढ़े हो
यही इन्ही के आंगन में ,
है अद्भुत , रहस्यमयी शक्ति इनमें
ऐसा यकीन होता है ,
वरना ऐसे कैसे ??
जीवन संभव होता है !
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#poem # Priye Kisan Mitra
इस बार , इस साल देखा मैंने , अपनी आंखों से धरती के रंग में रंगे , प्रिय किसान मित्र को , मिट्टी के कीचड़ से सने , मिट्टी के लाल प्रिय किसान ...